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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): भविष्य की दिशा

आज का युग विज्ञान और तकनीक का युग है। इस तकनीकी क्रांति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence – AI) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। AI का अर्थ है ऐसी मशीनें या कंप्यूटर प्रोग्राम बनाना जो इंसानों की तरह सोच सकें, समझ सकें और निर्णय ले सकें। आज AI केवल एक कल्पना नहीं, बल्कि हमारे दैनिक जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। AI का उपयोग हम रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई रूपों में करते हैं। जब हम मोबाइल में वॉयस असिस्टेंट से सवाल पूछते हैं, ऑनलाइन शॉपिंग में प्रोडक्ट सुझाव देखते हैं, या गूगल मैप से रास्ता खोजते हैं—इन सभी में AI काम करता है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें जो वीडियो या पोस्ट दिखती हैं, वे भी AI की ही देन हैं। इस प्रकार AI हमारे जीवन को आसान और तेज़ बना रहा है। शिक्षा के क्षेत्र में AI ने सीखने का तरीका बदल दिया है। आज छात्र AI की मदद से कठिन विषयों को आसान भाषा में समझ सकते हैं। ऑनलाइन पढ़ाई, पर्सनल लर्निंग ऐप्स और वर्चुअल टीचर AI पर आधारित हैं। इससे छात्रों को अपनी गति से सीखने का अवसर मिलता है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी AI सहायक साबित हो रहा है। स...
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ब्राह्मण कौन ??

ब्राह्मण समाज दुनिया के सबसे पुराने संप्रदाय एवं जाति में से एक है। वेदों एवं उपनिषदों के तथ्य के  अनुसार  "ब्राह्मण समाज का इतिहास" , सृष्टि के रचयिता "ब्रह्मा" से जुड़ा हुआ है। वेदों के अनुसार ऐसा बताया जाता है कि  "ब्राह्मणों की उत्पत्ति"  हिंदू धर्म के देवता "ब्रह्मा" से हुई थी। ऐसा माना जाता है कि वर्तमान समय में जितने भी ब्राह्मण समाज के लोग हैं वे सब भगवान ब्रह्मा के वंशज हैं। ब्राह्मणों का इतिहास प्राचीन भारत से भी पुराना माना जाता है, ब्राह्मण की जड़े वैदिक काल से जुड़ी हुई हैं। प्राचीन काल से ही ब्राह्मणों को समाज में उच्च स्थान प्राप्त था, उस समय ब्राह्मण जाति के लोग सबसे ज्ञानी माने जाते थे। इस जाति के लोगों को प्राचीन काल से ही उच्च एवं बड़े लोगों की श्रेणी में देखा जाता रहा है। उस दौर में धार्मिक एवं जाति मतभेद वर्तमान समय के मुकाबले चरम सीमा पर था, हिंदू धर्म के लोगों को "ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र" चार हिस्सों में बांटा गया था। इस जाति के बंटवारे में ब्राह्मण समाज के लोगों को सबसे उच्च स्थान प्र...

जाती के मुट्ठी में भारतीय लोकतंत्र

अभी कुछ दिन पहले ही उपराष्ट्रपति जी ने कहा था कि आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर देश को महत्वपूर्ण कामयाबी मिली है, लेकिन जाति, समुदाय और लिंग के आधार पर भेदभाव जिस तरह से बढ़े है वो सबसे बड़ी चिंता का विषय हैं। देश से जाति व्यवस्था खत्म होनी चाहिए और भारत का भविष्य जातिविहीन और वर्गविहीन होना चाहिए। उन्होंने गिरजाघरों, मस्जिदों और मंदिरों के प्रमुखों से जाति के आधार पर होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए काम करने को कहा है। देश कि प्रगति में बाधा है जाति की समस्या    जाति प्रथा एक सामाजिक कुरीति है। ये देश का दुर्भाग्य ही है जो देश को आजाद हुए 75 साल होने वाले है पर जाति कि सोच से बाहर नही निकल पाए है। हालांकि एक लोकतांत्रिक देश के नाते संविधान के किसी अनुच्छेद में राज्य के द्वारा धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर नागरिकों के प्रति जीवन के किसी क्षेत्र में भेदभाव नहीं किए जाने की बात कही ही गई होगी। लेकिन सरकार दोनों बातें बोलती है जहाँ एक तरफ जातिवाद को खत्म करने कि बात करते है तो दूसरी तरफ   सरकारी औहादे के लिए आवेदन या चयन की प्रक्रिया के वक्...

गरम चाय की प्याली

एक गरम चाय की प्याली हो  पीने वाली दिल वाली हो LOCKDOWN में  क्या से क्या हो गए  कल तक जो प्रोजेक्ट कोडिनेटर थे अब  टी सेलर हो गए  वक़्त वक़्त की बात है  कल भाव खाते थे अब क्या से क्या हो गए  चाय से ही अब जिंदगी चाय ही रोज़ी रोटी  पी लो सोना, पी लो मोना, जो कल चाय बेचते थे वो आज हैं PM,  हम आज बेच रहे हैं की कल कुछ होंगे, खुद भी पीजिये और, अपनों को भी पिलाएं ।। अजय टी स्टाल अपना घर,

धर्म और अधर्म

इंसान में धर्म और अधर्म दोनों ही गुण होते हैं। कभी धर्म बढ़ता है और कभी अधर्म, कभी हम धार्मिक बर्ताव करते हैं और कभी अधार्मिक। लेकिन जब भी इंसान के अंदर अधर्म का भाव आता है, तब उसके मन में उस अधर्म को न करने की एक लहर भी ज़रूर उठती है। उस लहर को वो सुने या ना सुने या उस पर भले ही वह ध्यान दे या न दे, अधर्म करने पर दिल बार-बार यह ज़रूर कहता है कि जो कर रहे हो, वह गलत है। ये एक मन की आवाज होती है जो धर्म जरूर देता है ।  और ये भी नहीं है कि जब कुछ बड़ा अधर्म करेंगे, तभी अंदर की आवाज़ आएगी, यह तो किसी का कुछ भी गलत करने पर भी आएगी। ये आवाज़ हर वक़्त आएगी, जब भी आप कोई गलत काम करेंगे। जाहिर है, लोग इसी आवाज़ को नज़रअंदाज़ करके अधर्म करते हैं। ये अंदर की आवाज़ कुछ और नहीं, बल्कि हमारी चेतना में बैठे भगवान कृष्ण की प्रेरणा है, जो हमें अधर्म न करने की सलाह देती रहती है। पर उस चेतना को सुनता कौन है जो हो रहा है सही ही हो रहा है यही सोच धर्म और अधर्म के बीच की दूरी पैदा करता है। जो इससे पार पा गया वो धार्मिक और जो नही पार पाया वो अधार्मिक।  खैर आज के जमाने मे इतना कौन सोचता है यही बोल कर सब आगे ...

जिंदगी कठिन है, यह मानकर ही जीना चाहिए|

  जिंदगी कठिन है। यह कठिन इसलिए है कि हम अपनी क्षमताओं को पहचानते ही नहीं। अपने आपसे रू-ब-रू नहीं होते, लक्ष्य की तलाश और तैयारी दोनों ही अधूरेपन से करते हैं। इसी कारण जीने की हर दिशा में हम औरों के मुंहताज बनते हैं, औरों का हाथ थामते हैं, उनके पदचिन्ह खोजते हैं। आखिर कब तक औरों से मांगकर उधार सपने जीते रहेंगे? कब तक औरों के साथ तुलते रहेंगे और कब तक बैशाखियों के सहारे मीलों की दूरी तय करते रहेंगे यह जानते हुए भी कि बैशाखियां सिर्फ सहारा दे सकती है, गति नहीं? मनुष्य  जीवन  में तभी ऊंचा उठता है, जब उसे स्वयं पर भरोसा हो जाए कि मैं अनंत शक्ति सम्पन्न हूं, ऊर्जा का के न्द्र हूं। अन्यथा जीवन में आधा दुःख तो हम इसलिए उठाते फिरते हैं, कि हम समझ ही नहीं पाते कि सच में हम क्या है? इसलिये जिंदगी कठिन है। हमें जिंदगी को कठिन मानते हुए ही जीना चाहिए और हमें बिना समय, भाग्य, परिस्थिति, अवसर, व्यक्ति की प्रतीक्षा किए इस कठिन जीवन के संग्राम को ‘कुछ’ कर सकने के हौंसले जीतने के लिए अग्रसर होना चाहिए।   एक महत्वपूर्ण पुस्तक ‘दि रोड लेस टेवल्ड’ के लेखक एम. स्कॉट पैक, एम.डी. कहते हैं ...

जिंदगी की जद्दोजहद

क्या ख़ता थी मेरी ए  खुदा -2 की मुझे ऐसी सजा दी है , सजा देनी ही थी तो मौत की देते, क्यों सजा में ये जद्दोजहद की ज़िंदगी दी है ! क्या कोई कमी थी मेरी साधना में आपके प्रति यदि थी तो जरा  बता देते , मैं कोशिश करता की दुबारा  ऐसी कोई  भूल ना हो मुझसे -2 पर आपने तो बिना कुछ कहे ही सजा दी है , और यदि सजा देनी ही थी तो मौत की देते , क्यों सजा में ऐसी जिंदगी दी है,, जिसका कोई मान नहीं कोई मोल नहीं ए खुदा आपने ये क्या कर दी है , क्यों सजा में ये जद्दोजहद की जिंदगी दी है ! पर मैं  हार नहीं मानूँगा मैं  -2 क्षत्रिय का रक्त है मेरे रग रग  में , चंद्रवंशी होने का गुमान है मेरे मन मे  ,कि ढूँढू गा आपको मै तबतक  जबतक प्राण है मेरे तन में और जिस दिन मिले ना आप हमे , बता दूँगा  मैं आपको की आपने कितनी बड़ी गलती की है ,  यदि आपको सजा देनी ही थी तो मौत की देते , क्यों आपने सजा में ये जद्दोजहद की जिंदगी दी है !!!!!! source